बुधवार 11 फ़रवरी 2026 - 13:40
इंक़ेलाब ए इस्लामी ईरान इस्तेअमार के ख़िलाफ़ इस्तिक़ामत, ख़ुद्दारी और इस्लाम की सर बलंदी की निशानी है।अल्लामा सैयद हुसनैन अब्बास गर्देज़ी

हौज़ा / सदर मजलिस ए उलेमा मकतब-ए-अहलेबैत पाकिस्तान ने कहा कि इस्लामी जम्हूरिया ईरान की सालगिरह के मौक़े पर हम पूरी उम्मत-ए-मुस्लिमह, आलम-ए-इस्लाम और ख़ास तौर पर इस्लामी ईरान की अज़ीम क़ौम को दिल की गहराइयों से मुबारकबाद पेश करते हैं।उन्होंने कहा कि यह दिन सिर्फ़ एक सियासी तब्दीली की याद नहीं है, बल्कि उस इलाही इंक़ेलाब की ताज़ा याद है जिसने इस्तिकबार, ज़ुल्म, शाह की आमिरियत और सामराजी ग़ुलामी के ख़िलाफ़ एक मज़लूम मगर बा-वक़ार क़ौम को खड़े होने, ख़ुद्दारी और ख़ुद-इनहिसारी की ताक़त दी।

हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार , इस्लामाबाद में अल्लामा सैयद हुसनैन अब्बास गर्देज़ी ने इंक़िलाब-ए-इस्लामी ईरान की 47वीं सालगिरह के मौक़े पर जारी अपने बयान में इन ख़यालात का इज़हार किया।

उन्होंने कहा कि पिछले दशकों में ईरान ने जिस इस्तिक़ामत, ख़ुदमुख्तारी और साइंसी व दिफ़ाई तरक़्क़ी का मुज़ाहिरा किया है, वह दुनिया के लिए साफ़ पैग़ाम है कि जो क़ौम ख़ुदा पर भरोसा और अपने नज़रिये पर यक़ीन रखती हो, उसे कोई ताक़त शिकस्त नहीं दे सकती।

आज इस्लामी ईरान न सिर्फ़ अपने इलाक़े में बल्कि आलमी सतह पर एक असरदार और ख़ुददार ताक़त के तौर पर सामने आया है, जो मज़लूमों की हिमायत और ज़ालिम निज़ामों के मुक़ाबले में डटकर खड़े होने की अलामत बन चुका है।

यह सब इंक़िलाब-ए-इस्लामी की बरकात, शोहदा के ख़ून और इमाम ख़ुमैनी (रह.) की बसीरत भरी क़ियादत का नतीजा है।

उन्होंने अज़ीम रहबर-ए-इंक़िलाब हज़रत इमाम ख़ुमैनी (रह.) को ख़िराज-ए-अक़ीदत पेश करते हुए कहा कि उन्होंने इस्लाम को सिर्फ़ मस्जिद तक महदूद नहीं रखा, बल्कि उसे एक ज़िंदा इंक़िलाबी निज़ाम के रूप में दुनिया के सामने पेश किया।

इसी तरह उन्होंने मौजूदा रहबर-ए-मुअज़्ज़म इंक़िलाब-ए-इस्लामी हज़रत आयतुल्लाहिल उज़्मा सैयद अली ख़ामेनई की बसीरत, शुजाअत और आलमी क़ियादत को सलाम पेश किया, जिनकी हिकमत और इस्तिक़ामत ने तमाम तूफ़ानों के बावजूद इंक़िलाब को सरबलंद रखा है।

आख़िर में उन्होंने अल्लाह तआला से दुआ की कि वह रहबर-ए-मुअज़्ज़म को लंबी उम्र अता फ़रमाए, इस्लामी ईरान को हर मैदान में मज़ीद कामयाबियाँ दे और इस इंक़िलाब को इमाम-ए-ज़माना (अ.स.) के ज़ुहूर और आलमी अद्ल के इंक़िलाब से मिला दे।

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